Tuesday, 7 June 2016

बड़े दिनों के बाद



बड़े दिनों के बाद आजसूरज से पहले जगी,
 बड़े दिनों के बाद सुबह की ठंढी हवा मुझ पर लगी।
बड़े दिनों के बाद पाया मन पर कोई बोझ नहीं,
बड़े दिनों के बाद उठकरसुबह नयी-नयी सी  लगी।
बड़े दिनों के बाद दिन के शुरुआत की उमंग जगी,
बड़े दिनों के बाद मन में पंख से हैं लगे कहीं।
बड़े दिनों के बाद आजमन में एक कविता उठी,
बबड़े दिनों के बाद आज,कविता काग़ज़ पर लिखी।   


   .......मोहिनी

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